अकेली ही रहती हूँ!

अकेलापन की ये कहानी,
जीवन की एक अनजानी निशानी।
विचलित मन की घनी घटाएं,
विचारों की आँधी में बह जाएं।

एकांत में छुपी हुई रहती हूँ,
खुद को खोया हुआ महसूस करती हूँ।
संगीन रातों में आवाज़ नहीं,
दिल की बेचारी उमंग नहीं।

दर्द भरी आँखों में बह रहा हूँ,
खुद को खोई हुई वह ढूंढ रही हूँ।
ज़िंदगी की राहों पर चलते चलते,
खुद का साथी खो गया जीते जी तू।

दिल की आवाज़ को रोक पाती नहीं,
खुद को खोया हुआ वह ढूंढ पाती नहीं।
गुमसुम रातों में चाँदनी की तरह,
मैं खुद को खोई हुई एक चिंतनी।

अनजान राहों में घूमती हूँ,
खुद को खोई हुई मैं ढूँढती हूँ।
गहरी तनहाई के आगे झुकते ही,
खुद को खोया हुआ वह मिलता नहीं।

अकेलापन की ये कहानी,
हर रोज़ नयी ज़िंदगी की कहानी।
यहाँ जीने का मतलब ढूंढ़ना है।

Waiting for her both cats!

In the twilight’s gentle glow, a worry unfurls,
A teenager’s heart, in a whirlwind of concern,
For amidst the setting sun’s declining light,
Her two cherished cats, they’ve yet to be in sight.
She paces the floors, her thoughts intertwined,
Anxiously yearning for their return, undefined,
In the silence of the evening, her heartstrings play,
As she wonders where her furry friends may stray.
Their names dance upon her lips, a fervent prayer,
Echoing through the night, awakening the air,
With every passing minute, doubts start to grow,
Imagining scenarios, both high and low.
Did they wander too far, enticed by the moon?
Or chase fleeting shadows, until late afternoon?
She longs for their comforting presence, near,
To ease her mind, dispel every fear.
Yet, hope blossoms, like a flower in bloom,
As she recalls their curiosity, their playful zoom,
They’ve ventured before, always finding their way,
Through meadows and alleys, where adventures lay.
But still, worry lingers, like a haunting breeze,
As she gazes outside, among the swaying trees,
A thousand questions dance in her searching eyes,
Yearning for their return, beneath starlit skies.
And then, upon the horizon, a silhouette appears,
Two familiar forms, drawing nearer, calming her fears,
Her cats prance and purr, tails held high,
As if saying, “Fear not, for we’re always nearby.”
She rushes to greet them, her heart now at ease,
Relief floods her spirit, like a comforting breeze,
For in their eyes, a tale of adventure reprise,
A reminder that love transcends boundaries and skies.
Together again, as a family so pure,
Their bond untouched, steadfast and sure,
The worry now fades, replaced by pure delight,
As they curl up together, embracing the night.
For in this teenage girl’s world, both wild and free,
Her cats are her solace, her companions, you see,
And as they find their way back, through dark and through light,
She learns the strength of love, transcending all fright.

भगवान के घर अंधेर नहीं है।

भगवान के घर अंधेर नहीं है!
स्वरचित – प्राची वार्षण्ये
सुबह से मीनू जी काम में लगीं थीं। सबको चाय दी, नाश्ते की तैयारी करी, काम वाली से झाड़ू पोंछा करवा के, उसको कपड़े धोने को दिये, डिश वॉशर से बर्तन निकाल के शेल्व्स में लगाये। तरबूज़ का जूस निकाल के बोतलों में भर के फ्रिज में रखा। तरबूज़ निकल जाने से फ्रिज में काफ़ी सारी जगह हो गई थी तो पानी में पड़े आम पौंछ कर फ्रिज में लगाये। कामवाली आके बोली “कल मोली भाभी का बर्थडे था क्या”? मीनू जी चौंक कर बोलीं “हाँ था, क्यों क्या हुआ”? तो कामवाली बोली “वो अंदर अपनी मम्मी को बात कर रही हैं तो बोल रहीं हैं की इतना पैसा है पर मम्मी बहुत कंजूस हैं”. मीनू जी चुप हो गईं। अपनी बांग्लादेशी काम वाली पर उनको बहू से ज़्यादा भरोसा था। बहू की बात बात में झूठ बोलने की आदत वो एक साल में खूब अच्छे से जान गईं थी। पर चुप ही रहती थीं। क्योंकि वो सारा दिन अपने कमरे में
ही रहती थी। सॉफ़्टवेयर इंजीनियर थी तो वर्क फ्रॉम होम ले रखा था।
मीनू जी चुप हो गईं।
उनको लगा कि बहू का ऑनलाइन ऑफिस है तो वो मीटिंग में होगी। इतनी देर से ख़ुद ही काम में लगी हुईं हैं। ये एक बार भी कमरे से बाहर नहीं निकली। और ऊपर से ये इल्ज़ाम भी की कुछ दिया नहीं। जबकि उन्होंने कल सुबह ही पाँच हज़ार बेटे को दिये थे की इसको सूट दिला लाना। वो चिल्ला भी रहा था की अभी पिछले हफ़्ते तो तीजो की दस हज़ार की शॉपिंग कराई है आपने। अब क्यों दे रही हो? पर उन्होंने ज़बरदस्ती बेटे को थमा दिये थे क्योंकि बहू लैपटॉप पर बिजी थी।
कुछ ही देर बाद ही उनका बेटा मोहित बाहर से बाल कटवा के वापस आया तो उन्होंने पूछा कि क्या कल तुम लोग ने कुछ ख़रीदा था मेरे दिये पैसों का? तो वो बोला की दिये तो थे, पर उसने कहा की जब बाय वन गेट वन की सेल लगेगी तो तब ख़रीद लूँगी। अभी रख लेती हूँ। मीनू जी ने कहा की “सही तो कहा उसने, समझदार है ख़ूब”। मोहित हँसता हुआ बाथरूम में चला गया।
थोड़ी देर बाद जब पराँठों की ख़ुशबू उड़नी शुरू हुई तो बहू ने कमरे से बाहर झांक के कहा “मम्मी नाश्ता रेडी हो गया, मैं आके ले लूँ”? मीनू जी ने कहा बेटा जब मीटिंग फिनिश हो जाये तो तसल्ली से खा लेना। उधर फिर बेड गंदा हो जाएगा। तो मोली ने कहा “तो ठीक है मैं ५-१० मिनट में आती हूँ”। अब पाँच दस मिनट तो दूर वो ठीक दो मिनट में आ कर डाइनिंग टेबल पर जम गई। मीनू जी आटे में घी दूध का मोयन डालके ऐसे बढ़िया पराँठे बनाती थीं की सात मोहल्लों तक ख़ुशबू उड़ती थी। मोली ने प्लेट में पनीर के सब्ज़ी, हरी चटनी, सोंठ के साथ चार मेथी आलू के पराँठे रख के ख़ाना शुरू कर दिया। सामने मंदिर की शेल्फ के पास पूजा करते मीनू जी के पति अमित जी उनकी तरफ़ देखा। पसीने में बेहाल मीनू जी ने इशारा किया की वो लगातार बना रही हैं, फ़िकर ना करें। दिल ही दिल में हंस भी दीं क्योंकि अमित जी को जान से ज़्यादा प्यारे थे पहली पाँत के सिके कुरकुरे पराँठे। जिन पर अब बहुरानी शान और अधिकार से हाथ साफ़ कर रही थी। मीनूजी को लगा था की ये एक एक करके लेगी। तो तब तक ये भी आके नाश्ता शुरू कर लेंगे।
इतनी ही देर में बेटा मोहित भी आ बैठा टेबल पर। थोड़ी ही देर में मीनू जी ने काम वाली को इशारा किया पराँठा बनाने को। वो भी नाश्ता करने लगीं। बोलीं “मोली ला बेटा अपनी मम्मी से बात कराना। वो सोचेंगी की मैं बात नहीं करती।”। मौली ने टिश्यु से हाथ पौंछ कर कहा “हाँ मुझे भी बात करनी ही थी, चलो साथ में बात करते हैं। मम्मी भी सोचेंगी की दो दिन हो गये मैंने कॉल क्यों नहीं किया”। कनखियों से उसने अमित जी और पति मोहित की तरफ़ देखा। दोनों पुरुष गर्व से मोली को देखने लगे की कितनी बढ़िया बात है। अमित जी ने मीनूजी को घूरा की देखो बिचारी माँ को फ़ोन तक नहीं करती।
मीनूजी दिल में घुट कर रह गईं। अब क्या कहतीं की झूठ की बड़ी सी पुड़िया है ये। बहू ने मोबाईल की तरफ़ हाथ बढ़ाया ही था की मोबाईल घनघनाने लगा। “लो ये तो मेरी मम्मी का ही है”। वो खिलखिला के हंस दी। स्पीकर पर मोबाईल ऑन करके वो बोलने ही वाली थी।उधर से चिल्लाती हुई आवाज़ आई मोली की माँ मंजुला जी की – “कर लिया नाश्ता? क्या बनाया था तेरी सास ने? बता तो नहीं दिया की आज छुट्टी है? कमरे में बैठी रह। मैं बाज़ार जा रही हूँ तो वीडियो काल कर लूँगी।फिर तू बताना की कौन से जूते लूँ, मैं बीस हज़ार से कम का नहीं लूँगी, तेरा इतना भारी प्रोमोशन हुआ है। मज़ाक़ बात है? मोहित को मत बताना अभी तीन चार महीने”।
अमित जी, मोहित तो जैसे जड़ हो गये, मोली का चेहरा शर्म और ग़ुस्से से तमतमा रहा था। उसने कहा “मम्मी कुछ भी बोलना शुरू कर देती हो, सब सुन रहे हैं। स्पीकर पर है मोबाईल मेरी सास बात करना चाहती हैं तुमसे”। अब मीनूजी को बहुत संतोष सा मिला, वो बोलीं “अरे आप बाज़ार गई हो तो रास्ते में से इसको भी पिक अप कर लो, ये तो सुबह से रूम में ही रहती है। इसी बहाने ये शॉपिंग कर आयेगी। मैंने कल इसको पाँच हज़ार दिये हैं बर्थडे गिफ्ट के, तो ये कुछ ख़रीद लेगी”। उधर से मोली की माँ ने हाँ या ना क्या कहा उनको कुछ पता नहीं। बहू ने ख़ाना पूरा खाया की नहीं, पति और बेटे ने नाश्ते में और पराँठे बनवाये की नहीं। पर मीनूजी ने एक ही पल में बहु का झूठ उसकी माँ को बता के जो तसल्ली महसूस की वो अतुलनीय थी।
एक साल से जितना काम उनकी बहू अपने वर्क फ्रॉम होम के नाम से करवा रही थी, जितना दुर्व्यवहार उनके पति और बेटा बहू की मोटी सेलरी के नाम पर उनके साथ कर रहे थे कि उसको का होता है वो सब आज एक पल में आँधी की तरह उड़ गया था। वो बाथरूम से सुन रही थीं की बेटा काम वाली से पैसे बढ़ाने कि बात कर रहा था कि आप ही ख़ाना बनाना शुरू कर दो। मम्मी को आराम रहेगा। पति जो इसी बात पर क्लेश शुरू कर देते थे की नहीं तुम ही बनाओ, भी अब भीगी बिल्ली की तरह हाँ में हाँ मिला रहे थे।
*कृपया कॉपी पेस्ट करके किसी और ग्रुप में पोस्ट ना करें। ये मैं अपनी वेबसाइट पर पोस्ट कर चुकी हूँ तो प्लेग्रिज्म का केस भी सकता है आप पर। 🙏🏻😆

Last week.

When is the last time you took a risk? How did it work out?

There was a Eid bazar very far away. Nobody was willing to go as a seller. But I took the risk. I found that school is very beautiful, we got huge place to display and amazingly rich customers were there. We sold our beautiful handmade bags in very good numbers.

Heavy hairfall protection hack!

मैंने लोरियाल का मैंगो शैम्पू इसीलिए बताया है क्यूँकि सिर्फ़ इससे ही मेरे सिर के बाल एक दम गिरना बंद हुए। मैंने हेयर कंडिशनर को यूज करना बिलकुल ही बंद कर दिया। उससे मेरे सिर के बालों की जड़ें बहुत ज़्यादा डेमेज हो रहीं थी। अब बाल भी घने लम्बे और स्वस्थ हैं। बालों को वोल्यूम देने के चक्कर में बड़ी कम्पनियाँ बहुत ज़्यादा केमिकल इस्तेमाल करती हैं जिनसे बाल बहुत ज़्यादा गिरने लगते हैं।